स्वयं से संवाद

जब लगे कि कोई नही इस जग में तुम्हारा तो याद रखना कि सीधे खड़े होने के लिए सहारे को त्यागना आवश्यक है, जब लगे कि ऊपरवाला भी तुम्हारे खिलाफ साज़िश कर रहा है तब याद रखना कि वो मुक़ाबला सिर्फ बराबर वालों के साथ करता है, जब लगे कि कुछ पाया नही इस जहान [...]

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तमाशा

इतने मशरूफ हैं हम गम-ए-ज़माने में की ये उलझी ज़ुल्फ़ें सवारने का वक़्त कहाँ हैं ? मंज़िल की ललक में सफर तय किए जा रहें हैं की दिल को रह-ए-सन्नाटे की खबर कहाँ हैं ? वक़्त निकाल कर मिला करते थे जिन दोस्तों को आज उनसे मिलने की फुरसत भी कहाँ हैं ? बहुत कुछ [...]

मुलाकात

आज मुद्दतों बाद तुम्हारा दीदार हुआ जैसे की नशे में था आज तक , और क्षण में नशा बेकार हुआ । यु तो अक्सर ही करते थे तुम गम-ए-मोहब्बत का इज़हार अपनी बातों से आज अपनी आँखों से हिसाब भी कर दिया । पूछती हूँ दिल से की क्यों है तवक्को तुमसे, क्या जीवन नहीं [...]

तो यह जगह तुम्हारी है।

अगर नींद से प्यारा है सपना, और ज़िद के साथ ले सकते हो जोखिम, तो यह जगह तुम्हारी है। अगर शुरू कर सकते हो अकेले और बढ़ने के लिए नहीं ढूंढोगे सहारा अगर भरोसा है खुदपर और अविश्वास नहीं है जग पर, तो यह जगह तुम्हारी है। अगर चल सकते हो अनथक और छांव का [...]